18 November, 2021

Dev Diwali : Dev Deepawali | importance of Dev Diwali | देव दीपावली : देव दिवाली क्यों मनायी जाती है।

भारत वर्ष में देव दीपावली (देव दिवाली) के दिन स्वर्ग के तमाम देवताओं का पृथ्वी पर सहर्षभेर आगमन – आचमन होता है और तमाम देवताओं के हर्षभेर स्वागत में भारत वर्ष की पवित्र धरती पर दीप जलाये जाते हैं।




देव दिवाली (देव दीपावली) का धार्मिक महत्व। Religious Significance of Dev Diwali (Dev Deepawali)

भारतीय केलेंडर के मुताबिक कार्तिक शुक्ल पक्ष की आमंत्रित उदया तिथि पूर्णिमा को देव दीपावली (देव दिवाली) का त्योहार भारत में मनाया जाता है। भारतीय पंडितो के मतानुसार देव दीपावली के दिन को को त्रिपुरारि पूर्णिमा, साथ साथ त्रिपुरोत्सव भीखा जाता हैं। भारत वर्ष की पवित्र धरती पर माना जाता है कि देव दिवाली दिन भगवान शिवजी ने तमाम देवताओं की वेद मंत्रोच्चार के साथ प्रार्थना सुनकर त्रिपुरासुर काहनन किया था, जिसकी खुशी में देवताओं ने दीप जलाकर देव दीपावली (देव दिवाली) उत्सव मनाया था। इसलिए इस उत्सव को देव दीपावली (देव दिवाली) के नाम से भी जाना जाता है। दिवाली के 14 दिन बाद पूर्णिमा की रात को देव दीपावली (देव दिवाली) का पर्व मनाया जाता है। इस देव दीपावली दिन स्नान कर दीपदान करने का बहुत अधिक महत्व माना जाता है।

देव दिवाली (देव दीपावली) की पूजा अर्चना । Worship of Dev Diwali (Dev Deepawali)

भारतीय शाश्त्र्कारो के मतानुसार किसी भी पवित्र शिव मंदिर में जाकर विधिवत शाश्त्र के नियमो के अनुसार षोडशोपचार पूजन अर्चन करें। गौघृत का दीप अवश्य करें, चंदन की धूप करें साथ साथ तिलक करे , भगवान को अबीर चढ़ाएं, खीर पूड़ी, गुलाब के फूल चढ़ाएं साथ साथ वंदन करना न भुले। पवित्र चंदन से शिवलिंग पर त्रिपुंड बनाएं और बर्फी का भोग अवश्य लगाएं।


देव दिवाली (देव दीपावली) की पूजा से क्या फायदा होता है । What is the benefit of worshiping Dev Diwali (Dev Deepawali).

भारत वर्ष की पवित्र धार्मिक मान्यता के अनुसार देव दिवाली के दिन गंगा – यमुना के घाट पर दीपावली मनाई जाती है - देव दीपावली मनाई जाती है । देव दीपावली के दिन गंगा में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती अवश्य है। इसके साथ ही देव दीपावली के दिन नदियों में दीपदान करने से लंबी आयु की प्राप्ति होती है।



देव दिवाली (देव दीपावली) के रोचक (facts) तथ्य । Interesting facts about Dev Diwali

: पाच दिवसीय देव दीपावली उत्सव देवोत्थान एकादशी से शुरू होता है और कार्तिक पूर्णिमा के दिन (देव दिवाली ) के दिन समाप्त होता है।

: कार्तिक पूर्णिमा के दिन लोग कार्तिक स्नान करते हैं।

: देव दिवाली (देव दीपावली) के दिन शाम को गौधृत से दीप जलाकर गंगा नदी में प्रवाहित किया जाता है।

: देव दिवाली की शाम को दशमेश्वर घाट पर भव्य गंगा आरती की होती है ।

: वाराणसी में गंगा आरती के दौरान भक्तजनों द्वारा भजन-कीर्तन, लयबद्ध ढोल-नगाड़ा, शंख बजाये जाते हैं।

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